रविवार, 12 जनवरी 2014

श्याम गोपाल गुप्त की कवितायें

                                 श्याम गोपाल गुप्त 



रचनात्मकता के आरंभिक प्रयास का सिताब दियारा ब्लॉग हमेशा स्वागत करता है | इसी प्रयास के क्रम में आज प्रस्तुत है .......      

           .......... सिताब दियारा ब्लॉग पर युवा कवि श्याम गोपाल गुप्त की कवितायें



एक ...

प्रगतिशील कवि



तुम प्रगतिशील कवि हो

मैं देखता हूँ तुम्हारी कविताएँ
और फिर तुम्हें
चाहता हूँ तुम्हें देखकर उनकी व्याख्या करना
कविता के माथे की सिकुड़न खोजना चाहता हूँ तुझमें  
उसकी चिंता की असलियत पहचानना चाहता हूँ
और बार -बार दौड़ा आता हूँ तुम्हारे पास
उसकी बिवाइयां खुरदुरे हाथ
भूख से छटपटाते आदमी की तड़प देखना था मुझे
तुम प्रगतिशील कवि हो
इसलिए मैं खोजना चाहता हूँ
तुम्हारे द्वारा प्रयुक्त हर शब्द का अर्थ
जब बात करते हो स्त्री स्वतंत्रता की
तो पूंछना चाहता हूँ
तुम्हारी पत्नी और बेटी से उसका अर्थ
तुम उड़ाते हो जाति पांति की धज्जियाँ
तो तुम्हारे नौकर से करवाना चाहता हूँ उसकी व्याख्या
हाँ तुम प्रगतिशील कवि हो
इसलिए मुझे छूट दो
कि मैं पूंछू तुम्हारी महरी से
तुम्हारी प्रगतिशीलता
मैं खोजता हूँ तुम्हारे अन्दर भी
स्वतंत्रता ,समानता और विश्वबंधुत्व
लेकिन यह क्या

सभी शब्दों के विलोम हो तुम
तुमने हर बार मुझे रोक लिया
उलझाते रहे अपनी कविताओं में
गिनाते रहे पुरस्कार
समझाते रहे उपलब्धियां
तुम मेरे प्रिय कवि थे
लेकिन दुख है
शब्द शिल्पी
कि तुम छल की भाषा से
छल रहे हो कविता को |


दो ...

सयानी लड़की - 1  

सयानी होती लड़की को
देखना मना है सपने
रिश्तों को संजोने में
बिखर जाते है
सपनें
घर बासन चमकाने की फ़िक्र
जिंदगी को कर देती है
धूमिल
सयानी होती लड़की
होने लगाती है ख़ामोश
मुस्कराहट पर लग जाती है
लगाम
माँ -बाप खोजते है किसी और के साथ
उसका भविष्य
खिलने से पहले
छिन जाती है
धूप
जितना अधिक सिकुड़ जाती है
समझते है लोग
लड़की सयानी हो गयी है  

सयानी लड़की -२

उसे क्या पता था
उसकी पढाई
भार बन कर आएगी पिता पर
योग्य वर की तलाश में
विखर जायेगे कितने ही सपने
उसके अरमानों का क्या
वे तो किताबों के साथ दफ़न हो गए
आखिर माँ बाप कब तक इंतजार करते
उसकी नौकरी का 
और भी तो लड़कियाँ ब्याहनी है
वह सोचती 
सच में वह सयानी हो गयी है
उसे विश्वास नहीं होता
टटोलती अपना शरीर
सोचती सखियों को
जिनकी गोद में खेल रहे बच्चे
और जो समय से पहले
बूड़ी दिखने लगी है
अंततः उसे मानना पड़ता
वह सयानी हो गयी है 


परिचय और संपर्क

श्याम गोपाल गुप्त
उम्र – 25 वर्ष
ग्राम -सुबांव राजा , पोस्ट -कनोखर
जिला –मिर्ज़ापुर , उ.प्र.(भारत )
मो.... 8923225017
          

6 टिप्‍पणियां:

  1. ये कविताएँ पढ़ कर खुशी हुई। श्यामगोपाल जी को ऐसे ही किसी मंच पर देखना चाहता था। यह उनका आरम्भिक आगमन है, किंतु मुझे आशा है, कि प्रगतिशीलता के सही मायने की तलाश में निकला यह कवि निश्चित तौर पर ईमानदार कविताएँ प्रस्तुत करेगा। सयानी लड़की एक तल्ख हकीकत है, संकुचन को ही उनका सयानापन मान लिया गया है। कवि को बधाई!! और सिताब दियारा को धन्यवाद!!

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  2. अच्छी कविता के लिए धन्यवाद श्याम गोपाल जी। इसी तरह लिखते रहिए, अपने आप को प्रगतिशील कहने वाले अध्यापकीय लेखक ही सबसे बड़े प्रगतिशील विरोधी हैं।

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  3. श्याम जी मेरे अभिन्न मित्र व बड़े भाई हैं । बीएचयू में साथ पढ़ते हुए बहुत सारी कविताओं का पाठ हम सब अक्सर उनसे सुना करते थे। मैंने कई बार आग्रह भी किया क् आप अपनी कविताओं को संग्रहीत कर एक कविता संग्रह निकालें ताकि उनकी कविता लोगों के बीच पहुँच सके लेकिन वे यह कह कर टाल देते हैं कि यह काम तुम्हीं क्यों नहीं करते? अवसर मिला तो अवश्य ऐसा ही करूँगा बड़े भाई, पर अभी इस कार्य के संपादन के लिए आपकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ।

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  4. श्याम जी मेरे अभिन्न मित्र व बड़े भाई हैं । बीएचयू में साथ पढ़ते हुए बहुत सारी कविताओं का पाठ हम सब अक्सर उनसे सुना करते थे। मैंने कई बार आग्रह भी किया क् आप अपनी कविताओं को संग्रहीत कर एक कविता संग्रह निकालें ताकि उनकी कविता लोगों के बीच पहुँच सके लेकिन वे यह कह कर टाल देते हैं कि यह काम तुम्हीं क्यों नहीं करते? अवसर मिला तो अवश्य ऐसा ही करूँगा बड़े भाई, पर अभी इस कार्य के संपादन के लिए आपकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ।

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  5. श्याम जी मेरे अभिन्न मित्र व बड़े भाई हैं । बीएचयू में साथ पढ़ते हुए बहुत सारी कविताओं का पाठ हम सब अक्सर उनसे सुना करते थे। मैंने कई बार आग्रह भी किया क् आप अपनी कविताओं को संग्रहीत कर एक कविता संग्रह निकालें ताकि उनकी कविता लोगों के बीच पहुँच सके लेकिन वे यह कह कर टाल देते हैं कि यह काम तुम्हीं क्यों नहीं करते? अवसर मिला तो अवश्य ऐसा ही करूँगा बड़े भाई, पर अभी इस कार्य के संपादन के लिए आपकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ।

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